# धारा 241: दस्तावेज़ और डिजिटल साक्ष्य के विनाश को रोकना

**URL:** <https://citizen.complainthub.org/t/topic/17240>\
**Category:** Social and Economic Awareness\
**Tags:** भारतीयन्यायसंहिता, धारा241\
**Created:** [February 9, 2025, 2:51am UTC](https://citizen.complainthub.org/t/topic/17240 "2025-02-09T02:51:38Z")\
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**Author:** ![complainthub-team](https://citizen.complainthub.org/user_avatar/citizen.complainthub.org/complainthub-team/32/9584_2.png) [@complainthub-team](https://citizen.complainthub.org/u/complainthub-team)\
**Post date:** [February 9, 2025, 2:51am UTC](https://citizen.complainthub.org/t/topic/17240/1 "2025-02-09T02:51:39Z")

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भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 241 तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति किसी दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को छुपाता, नष्ट करता, या बदलता है जिसे कानूनी रूप से अदालत में या किसी लोक सेवक के सामने साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है।

यह धारा न्याय में बाधा डालने वाले कार्यों को रोकने के लिए बनाई गई है।

**सजा:**  
जो कोई दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को नष्ट करता है, उसे तीन साल तक की कैद, या ₹5,000 तक के जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

**यह कैसे सुरक्षा प्रदान करती है:**  
यह धारा न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद करती है और साक्ष्य छुपाने या नष्ट करने के प्रयासों को रोकती है।

यह सुनिश्चित करती है कि महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित रहें और न्याय प्रणाली में उनका उचित उपयोग हो सके।

**उदाहरण:**  
यदि कोई व्यक्ति न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले वित्तीय रिकॉर्ड को नष्ट कर देता है, तो वह इस धारा के तहत दोषी होगा।

इसी तरह, यदि कोई जांच में उपयोग होने वाला सीसीटीवी फुटेज जानबूझकर मिटा देता है, तो उसे भी इस कानून के तहत सजा मिलेगी।

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