# धारा 182: मुद्रा जैसी दिखने वाली दस्तावेज़ों से धोखाधड़ी रोकना

**URL:** <https://citizen.complainthub.org/t/topic/17441>\
**Category:** Social and Economic Awareness\
**Tags:** धारा182, भारतीयन्यायसंहिता\
**Created:** [February 11, 2025, 2:08am UTC](https://citizen.complainthub.org/t/topic/17441 "2025-02-11T02:08:50Z")\
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**Author:** ![complainthub-team](https://citizen.complainthub.org/user_avatar/citizen.complainthub.org/complainthub-team/32/9584_2.png) [@complainthub-team](https://citizen.complainthub.org/u/complainthub-team)\
**Post date:** [February 11, 2025, 2:08am UTC](https://citizen.complainthub.org/t/topic/17441/1 "2025-02-11T02:08:50Z")

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भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 182 तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति ऐसा दस्तावेज़ बनाता, उपयोग करता, या वितरित करता है, जो मुद्रा नोट या बैंक नोट जैसा दिखता है और दूसरों को भ्रमित करने या धोखा देने के लिए तैयार किया गया हो।

यह धारा धोखाधड़ी को रोकने के लिए कड़े नियमों का प्रावधान करती है।

**सजा:**  
जो कोई मुद्रा नोट या बैंक नोट जैसा दिखने वाला दस्तावेज़ बनाता या उपयोग करता है, उसे ₹300 तक के जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

यदि कोई व्यक्ति ऐसे दस्तावेज़ के निर्माता का नाम और पता बताने से मना करता है, तो उसे ₹600 तक के जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

**दायित्व की धारणा:**  
यदि किसी दस्तावेज़ पर किसी व्यक्ति का नाम दिखाई देता है, तो यह माना जाएगा कि उन्होंने इसे बनवाया है, जब तक कि वे इसके विपरीत साबित न करें।

**यह कैसे सुरक्षा प्रदान करती है:**  
यह धारा नकली जैसे दिखने वाले दस्तावेजों को बनाने या वितरित करने से रोकती है, ताकि सार्वजनिक विश्वास और मुद्रा की विश्वसनीयता बनी रहे।

यह सुनिश्चित करती है कि ऐसे दस्तावेज़ बनाने में शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए।

**उदाहरण:**  
यदि कोई व्यक्ति ₹500 के नोट जैसा दिखने वाला विज्ञापन छापता है, तो वह इस धारा के तहत दोषी होगा।

इसी तरह, यदि कोई प्रचार सामग्री को बैंक नोट की तरह तैयार करता है, तो उसे सजा दी जाएगी।

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