धारा 302: धार्मिक अपमान से सुरक्षा

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 302 तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए शब्द बोलता है, ध्वनि निकालता है, संकेत करता है, या कोई वस्तु प्रदर्शित करता है। यह धारा धार्मिक सद्भाव और आपसी सम्मान बनाए रखने के लिए बनाई गई है।

सजा:
जो कोई जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कार्य करता है, उसे एक साल तक की कैद, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

यह कैसे सुरक्षा प्रदान करती है:
यह धारा धार्मिक भावनाओं के प्रति सम्मान बनाए रखने में मदद करती है और सुनिश्चित करती है कि किसी व्यक्ति की आस्था का अपमान न किया जाए। यह सांप्रदायिक सौहार्द्र और संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करती है।

उदाहरण:
यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी धार्मिक प्रतीक का अपमान करता है ताकि लोगों की भावनाएं भड़कें, तो वह इस धारा के तहत दोषी होगा।

इसी तरह, यदि कोई व्यक्ति पूजा स्थल में कोई आपत्तिजनक वस्तु रखता है जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हों, तो उसे सजा दी जाएगी।