धारा 270: सार्वजनिक उपद्रव रोकने के उपाय

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 270 सार्वजनिक उपद्रव को परिभाषित करती है। यह तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति ऐसा कार्य करता है या कोई अवैध चूक करता है जिससे जनता या आस-पास रहने वाले लोगों को चोट, खतरा, या असुविधा होती है।

इसमें सार्वजनिक अधिकारों में बाधा डालने या सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाले कार्य शामिल हैं।

सजा:
जो कोई सार्वजनिक उपद्रव करता है, उसे छह महीने तक की कैद, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा।

यह कैसे सुरक्षा प्रदान करती है:
यह धारा सार्वजनिक स्थलों और सामुदायिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

यह उन कार्यों को हतोत्साहित करती है जो जनता की शांति, स्वास्थ्य और सुविधा में बाधा डालते हैं।

उदाहरण:
यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक सड़क को अवरुद्ध करता है, सार्वजनिक जल स्रोत को दूषित करता है, या खतरनाक सामग्री को सार्वजनिक स्थान पर छोड़ देता है, तो वह सार्वजनिक उपद्रव के लिए दोषी होगा।