धारा 9: एक ही अपराध के लिए एकाधिक दंड को रोकना

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 9 यह सुनिश्चित करती है कि यदि कोई अपराध कई हिस्सों से बना है, और उन हिस्सों में से प्रत्येक स्वयं एक अपराध है, तो अपराधी को प्रत्येक भाग के लिए अलग-अलग दंड नहीं दिया जाएगा, जब तक कि कानून विशेष रूप से ऐसा न कहे। यह अनुचित या अत्यधिक सजा को रोकने में मदद करता है।

मुख्य प्रावधान:

एकाधिक भागों से बने अपराध के लिए केवल एक सजा

यदि कोई अपराध कई भागों में विभाजित है, और प्रत्येक भाग अपने आप में एक अपराध है, तो अपराधी को प्रत्येक भाग के लिए अलग-अलग सजा नहीं दी जाएगी, जब तक कि कानून विशेष रूप से ऐसा न कहे।

एक अपराध जो कई कानूनी परिभाषाओं में आता है, उसके लिए केवल एक सजा

यदि कोई कार्य दो या अधिक कानूनी परिभाषाओं में आता है, या कई कार्य मिलकर एक नया अपराध बनाते हैं, तो अपराधी को केवल एक अपराध के लिए अधिकतम सजा दी जाएगी, न कि सभी अपराधों की कुल सजा।

उदाहरण:

उदाहरण 1: छड़ी से मारना

यदि A ने Z को 50 बार छड़ी से मारा, तो A पर पूरे मारपीट के लिए आरोप लगाया जा सकता है या प्रत्येक प्रहार के लिए अलग-अलग आरोप लगाए जा सकते हैं।

लेकिन, A को केवल एक बार सजा मिलेगी, प्रत्येक प्रहार के लिए अलग-अलग सजा नहीं दी जाएगी, क्योंकि ऐसा करने से अत्यधिक सजा (जैसे 50 साल की सजा 50 प्रहारों के लिए) हो सकती थी।

उदाहरण 2: दो अलग-अलग व्यक्तियों पर हमला करना

यदि A, Z को मार रहा है, और Y बीच में आता है, और A जानबूझकर Y को भी मारता है, तो:

Z पर हमला और Y पर हमला दो अलग-अलग अपराध हैं।

A को दोनों अपराधों के लिए अलग-अलग सजा मिलेगी, क्योंकि ये एक ही कृत्य का हिस्सा नहीं हैं।

यह कैसे सुरक्षा प्रदान करती है?

यह सुनिश्चित करता है कि अपराधी को अनुचित रूप से अधिक सजा न दी जाए।

एक अपराध के विभिन्न भागों के लिए एक ही सजा दी जाती है, जिससे सजा की अवधि अत्यधिक लंबी न हो।

यदि अपराधी कई अलग-अलग अपराध करता है, तो उसे हर अपराध के लिए अलग सजा मिल सकती है।

अन्य उदाहरण:

यदि कोई व्यक्ति 10 नकली चेक के माध्यम से धोखाधड़ी करता है, तो उसे प्रत्येक चेक के लिए अलग-अलग सजा नहीं दी जाएगी, बल्कि पूरे धोखाधड़ी के लिए एक ही सजा दी जाएगी।

यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी के दौरान किसी को घायल कर देता है, तो उसे धोखाधड़ी और हमले के लिए अलग-अलग सजा मिलेगी।

1 Like