भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 26 कहती है कि यदि किसी व्यक्ति की सहमति से और उसके लाभ के लिए कोई कार्य सच्ची नीयत से किया जाता है, तो वह अपराध नहीं माना जाएगा, भले ही उससे कुछ हानि हो, जब तक मृत्यु का इरादा नहीं हो।
मुख्य प्रावधान
सच्ची नीयत से किया गया कार्य अपराध नहीं है
यदि कार्य किसी व्यक्ति के लाभ के लिए किया गया हो,
और व्यक्ति ने सहमत होकर जोखिम स्वीकार किया हो,
तो यह अपराध नहीं होगा, भले ही हानि हो जाए।
व्यक्ति को जोखिम का ज्ञान और सहमति होनी चाहिए
व्यक्ति को संभावित खतरे का पता होना चाहिए और उसने इसे स्वेच्छा से स्वीकार किया हो।
यह डॉक्टरों, बचावकर्मियों, और देखभालकर्ताओं को सुरक्षा देता है।
इरादा महत्वपूर्ण है
यदि कार्य बचाने या लाभ पहुंचाने के लिए किया गया हो और हत्या का इरादा न हो, तो यह दंडनीय नहीं होगा।
उदाहरण
मेडिकल सर्जरी:
एक डॉक्टर जोखिमभरी सर्जरी करता है ताकि मरीज की जान बचाई जा सके।
मरीज को जोखिम का पता है और उसने सहमति दी है।
यदि मरीज की मृत्यु हो जाती है, तो भी डॉक्टर अपराधी नहीं होगा, क्योंकि यह कार्य सच्ची नीयत से किया गया था।
राहत बचाव कार्य:
एक दमकलकर्मी किसी व्यक्ति को जलती हुई इमारत से बचाने के लिए खिड़की से कूदता है।
उस व्यक्ति को चोट लग जाती है।
लेकिन दमकलकर्मी अपराधी नहीं होगा, क्योंकि यह कार्य उस व्यक्ति की सुरक्षा के लिए किया गया था।
यह कैसे सुरक्षा प्रदान करता है
चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को कानूनी सुरक्षा देता है ताकि वे जीवनरक्षक उपचार कर सकें।
बचाव अभियान को बढ़ावा देता है, ताकि लोग बिना किसी कानूनी डर के सहायता कर सकें।
व्यक्ति को स्वेच्छा से जोखिम लेने का अधिकार प्रदान करता है।