भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 14 यह प्रावधान करती है कि यदि कोई व्यक्ति कानून के अनुसार कार्य करता है, या यदि वह किसी तथ्यात्मक भूल के कारण लेकिन ईमानदारी से यह मानता है कि वह ऐसा करने के लिए बाध्य है, तो यह अपराध नहीं माना जाएगा। हालांकि, यह प्रावधान केवल तथ्यात्मक भूल (Mistake of Fact) पर लागू होता है, न कि कानून की गलत व्याख्या (Mistake of Law) पर।
मुख्य प्रावधान:
यदि कोई व्यक्ति कानूनी कर्तव्य के तहत कार्य करता है, तो यह अपराध नहीं होगा
यदि किसी व्यक्ति को कानून द्वारा कोई कार्य करने के लिए बाध्य किया जाता है, तो वह कार्य अपराध नहीं माना जाएगा, भले ही उसके कारण कोई हानि हो।
तथ्यात्मक भूल के कारण किया गया कार्य अपराध नहीं होगा
यदि कोई व्यक्ति किसी तथ्यात्मक भूल के कारण, लेकिन ईमानदारी से यह मानता है कि वह कानून का पालन कर रहा है, तो उसे अपराधी नहीं माना जाएगा।
यह प्रावधान कानून की गलत व्याख्या (Mistake of Law) पर लागू नहीं होगा।
उदाहरण:
उदाहरण 1: आदेश का पालन करने वाला सैनिक
यदि A, जो एक सैनिक है, अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश पर भीड़ पर गोली चलाता है और यह कार्य कानून के अनुरूप है, तो A ने कोई अपराध नहीं किया।
उदाहरण 2: गिरफ्तारी में पहचान की गलती
यदि A, जो एक न्यायालय अधिकारी है, न्यायालय के आदेश पर Y को गिरफ्तार करने जाता है, लेकिन उचित जांच के बाद गलती से Z को Y समझकर गिरफ्तार कर लेता है, तो A अपराध का दोषी नहीं होगा।
यह कैसे सुरक्षा प्रदान करती है?
उन व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करती है जो कानूनी अधिकार के तहत कार्य कर रहे होते हैं।
ईमानदार तथ्यों की गलतफहमी को मान्यता देती है, जिससे निर्दोष लोगों को सजा से बचाया जा सके।
कानूनी अज्ञानता (Ignorance of Law) को बचाव के रूप में मान्यता नहीं देती, जिससे कानून का दुरुपयोग न हो।
अन्य उदाहरण:
यदि एक पुलिस अधिकारी वारंट के आधार पर किसी संदिग्ध को गिरफ्तार करता है, लेकिन पहचान की गलती हो जाती है, तो यह अपराध नहीं होगा।
यदि कोई सरकारी अधिकारी किसी संपत्ति को अवैध मानकर जब्त करता है, लेकिन वह वास्तव में वैध होती है, तो यह कोई अपराध नहीं होगा यदि कार्य ईमानदारी से किया गया था।